महाराष्ट्र में सरकारी अस्पतालों की नर्सों ने शुरू की हड़ताल

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महाराष्ट्र में सरकारी अस्पतालों की नर्सों ने शुरू की हड़ताल
महाराष्ट्र में सरकारी अस्पतालों की नर्सों ने हड़ताल शुरू किया है। दरअसल सातवें वेतन आयोग की कमियों के विरोध में नागपुर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और इंदिरा गांधी कॉलेज एवं अस्पताल की नर्सों ने हड़ताल शुरू किया है।

महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेज में नर्सों की ठेकेदारी पद्धति द्वारा की जा रही नियुक्ति का महाराष्ट्र राज्य परिचारिका संगठन ने विरोध किया है। सरकार की दोषपूर्ण नीतियों के खिलाफ सातवें वेतन आयोग की कमियों के विरोध में नागपुर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की नर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गई हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरीके से चरमराती दिख रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नागपुर मेडिकल कॉलेज में लगभग 1000 के आसपास नर्सेस हैं, जो स्ट्राइक पर चली गई हैं। वहीं 200 से 250 नर्सेस इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज की स्ट्राइक पर चली गई हैं।

नर्सों ने शुरू की हड़ताल

दरअसल सातवां वेतन आयोग लागू होने के बावजूद नर्सिंग सर्विसेज की वेतन विसंगतियां दूर नहीं की गईं। इसको लेकर 15 और 16 जुलाई को मुंबई के आजाद मैदान में राज्य भर की नर्सों ने धरना प्रदर्शन किया था। उसके बाद राज्य भर की नर्सों ने कल एकदिवसीय काम बंद आंदोलन किया और हड़ताल पर चली गईं।

क्या बोले अधिकारी

नागपुर मेडिकल कॉलेज के सुपरिटेंडेंट अविनाश गावंडे ने बताया कि नर्सों के स्ट्राइक पर चले जाने की वजह से नागपुर के मेडिकल कॉलेज में अन्य जगहों से नर्स बुलाई गई हैं। अस्पताल में सर्जरी के लिए आगे की तारीख दी जा रही है। अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से कुछ सामान्य जो सर्जरी हैं, उसकी अगली तारीख दी जा रही है, उसे टाला जा रहा है। अविनाश गावंडे ने बताया कि नर्सों के कुछ संगठन जो स्ट्राइक पर नहीं हैं, उन्होंने काम संभाला है। सिविल सर्जन ऑफिस से भी नर्स को बुलाया गया है, डिप्टी डायरेक्टर ऑफिस के कार्यालय से भी नर्सें बुलाई गई हैं, साथ ही स्टूडेंट नर्सों को भी काम पर लगाया गया है। कुछ ऑपरेशन जो इमरजेंसी वाले नहीं हैं, सामान्य ऑपरेशन हैं, उन्हें पोस्टपोन किया गया है। मरीजों का इलाज ठीक से चल रहा है।

नर्सिंग स्टाफ ने क्या कहा?

हड़ताल पर गई नर्सिंग स्टाफ ने कहा कि नर्सिंग स्टाफ को लंबे समय से वेतन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने 2017 में सातवें वेतन आयोग लागू करने हेतु बक्शी समिति गठित की थी। स्टाफ नर्स, सिस्टर इंचार्ज, पाठ निर्देशिका और स्वर्णजनिक स्वास्थ्य विभाग की बाल रोग की नर्सों के साथ-साथ वेतन संबंधी अन्याय हो रहा है। 2022 में इससे पहले नर्सों ने 10 दिन का आंदोलन किया था। इसके बाद सरकार ने लिखित रूप में ठेका भर्ती प्रक्रिया रद्द करने, अस्थाई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का अश्वसान दिया था, लेकिन आश्वासन की अब तक पूर्ति नहीं हो सकी है।

Red Max Media
Author: Red Max Media

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