बीआरबीसीएल पावर प्लांट में शौचालय घोटाला

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औरंगाबाद जिले के बीआरबीसीएल पावर प्लांट में सीएसआर फंड से शौचालय निर्माण में करोड़ों का घोटाला सामने आया है। सीबीआई ने जांच तेज कर दी है और आरोपियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। एनटीपीसी के एजीएम आरके उपाध्याय मुख्य आरोपी हैं। कई सरकारी स्कूलों में शौचालय निर्माण की हकीकत जांची जा रही है।

बिहार के औरंगाबाद जिले में बीआरबीसीएल के पावर प्लांट में शौचालय निर्माण के नाम पर करोड़ों का घोटाला सामने आया है। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। आरोप है कि कंपनी के सीएसआर फंड से शौचालय निर्माण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। इस मामले में एनटीपीसी के एजीएम आरके उपाध्याय मुख्य आरोपी हैं। सीबीआई ने उनसे पूछताछ भी की है। कई और अधिकारियों के भी इस घोटाले में शामिल होने की आशंका है। यह मामला कुछ साल पहले का है जब देव, बारुण और नवीनगर प्रखंडों के सरकारी स्कूलों में शौचालय निर्माण के लिए सीएसआर फंड से पैसे दिए गए थे। जांच में पाया गया है कि कई जगहों पर तो शौचालय बना ही नहीं और जहां बना भी, वहां घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया। कुछ जगहों पर तो पुराने शौचालयों की मरम्मत करके उसे नया बताकर पैसे हड़प लिए गए।

तत्कालीन एजीएम आरके उपाध्याय गंभीर आरोप

आरोप है कि 2015-16 में तत्कालीन एजीएम आरके उपाध्याय ने अपने पद का दुरुपयोग करके इस घोटाले को अंजाम दिया। सीबीआई को शक है कि इस घोटाले में कंपनी के कई छोटे-बड़े अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। सीबीआई की टीम ने औरंगाबाद के नबीनगर स्थित बीआरबीसीएल के पावर प्लांट पर छापा मारकर घोटाले से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। टीम ने 12 घंटे से भी अधिक समय तक दस्तावेजों की जांच की। इस घोटाले में अब तक 230 शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ी पकड़ी गई है। सीबीआई ने इस मामले में बीआरबीसीएल के तत्कालीन एजीएम आरके उपाध्याय को मुख्य आरोपी बनाया है। आरके उपाध्याय फिलहाल उत्तर प्रदेश के सिंगरौली में एनटीपीसी के पावर प्लांट में कार्यरत हैं। इस घोटाले में शौचालय निर्माण का ठेका पाने वाली कोलकाता की कंपनी इंडिकॉन इंटरप्राइजेज और सब-कॉन्ट्रैक्टर रोहतास श्री जी इंटरप्राइजेज के सुशील कुमार पांडेय को भी आरोपी बनाया गया है।

बिहार के तीन जिलों से जुड़ा पूरा मामला

यह घोटाला औरंगाबाद, अरवल, रोहतास और जहानाबाद जिलों से जुड़ा हुआ है। इन जिलों में कंपनी के सीएसआर फंड से शौचालयों का निर्माण होना था। सीबीआई को शक है कि इन जिलों में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। सीबीआई की टीम एजीएम और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों की भी जांच कर रही है। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घोटाले की रकम कहां-कहां भेजी गई। जांच में यह बात सामने आई है कि सीएसआर फंड से बनने वाले 230 शौचालयों में से कई तो बने ही नहीं। जो बने भी हैं, वे भी बेहद घटिया स्तर के हैं। कई स्कूलों में तो दो शौचालयों की जगह सिर्फ एक ही शौचालय बना है। शौचालय निर्माण के ठेकेदार सुशील कुमार पांडेय ने सीबीआई को बताया है कि 30-40 शौचालय दूर-दराज के इलाकों में होने की वजह से नहीं बन पाए।

आरके उपाध्याय पर अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप

यह मामला पहले एनटीपीसी की निगरानी शाखा में दर्ज कराया गया था। शिकायत मिलने के बाद एनटीपीसी के चीफ विजिलेंस ऑफिसर ने इसकी जांच की। जांच में मामला सही पाए जाने के बाद सीईओ ने इसे गंभीरता से लिया। इसके बाद सीबीआई को बीआरबीसीएल के एजीएम रहे आरके उपाध्याय पर अवैध संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली। सीबीआई ने 17 फरवरी 2022 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की। मामले की शुरुआती जांच के बाद सीबीआई जबलपुर के एसआई जुगल किशोर ने इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले को एसीबी पटना ट्रांसफर कर दिया गया और 20 मई 2024 को प्राथमिकी दर्ज की गई। एनटीपीसी ने भी इस मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी एजीएम का वेतन दो साल के लिए रोक दिया है। इस मामले में एजीएम आरके उपाध्याय के भाई उमेश कुमार उपाध्याय ने भी सीबीआई से शिकायत की है। शिकायत के मुताबिक, राकेश ने अपने भाई के खाते में 2002 से 2004 के बीच 5.5 लाख रुपये, 2010 से 2014 के बीच 50 लाख रुपये और 2014 से 2015 के बीच 35 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे।

 

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Author: Red Max Media

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