फ्लैट खरीददारों को नहीं मिला मालिकाना हक

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फ्लैट खरीददारों को नहीं मिला मालिकाना हक
गार्डेनिया एम्स ग्लोरी परियोजना के बिल्डर की मनमानी पर नोएडा प्राधिकरण और शासन-प्रशासन अंकुश लगाने में नाकाम रहे हैं। बिल्डर ने फ्लैट खरीदारों से पूरी रकम वसूल ली लेकिन उन्हें मालिकाना हक नहीं दिया। परियोजना में फ्लैट की रजिस्ट्री न होने पर 350 फ्लैट खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 18 नवंबर को मामले में पहली सुनवाई होगी।
सेक्टर-46 स्थित गार्डेनिया एम्स ग्लोरी परियोजना के गार्डेनिया एम्स डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड बिल्डर की मनमानी पर प्राधिकरण ही नहीं, बल्कि शासन, प्रशासन तक अंकुश लगा पाने में नाकाम है। बिल्डर ने सोसायटी में रहने वाले 1276 निवासियों ने फ्लैट में कब्जा देने के नाम पर सौ प्रतिशत राशि वसूल ली, लेकिन आज उन्हें मालिकाना हक नहीं दिया। 

जबकि बिल्डर को प्राधिकरण से वर्ष 2019 में 551 फ्लैट की रजिस्ट्री कराने के लिए अक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी यानी कब्जा प्रमाण पत्र) दिया था, बावजूद एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई। एक वर्ष में रजिस्ट्री नहीं होने पर नियमानुसार प्राधिकरण को ओसी रद करनी पड़ी। 

350 फ्लैट खरीदार ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

जब निवासियों को यह पता चला कि बिल्डर मनमानी पर उतारू है तो बिल्डर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। परियोजना में फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं कराने पर 350 फ्लैट खरीदार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसकी पहली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।गार्डेनिया एम्स डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमित ने बताया कि तत्कालीन सीईओ रितु माहेश्वरी ने ओसी जारी करने पर शर्त रख दी थी कि रेरा के तहत एस्क्रो अकाउंट खुलवाया जाएगा, जिसमें ओसी के तहत आने वाली राशि का सौ फीसद हिस्सा प्राधिकरण बकाया राशि के लिए लेगा, लेकिन परियोजना के निर्माण पर फाइनेंस करने वाला बैंक के प्राधिकरण की शर्त से सहमत नहीं था।

30 प्रतिशत राशि बैंक के बकाया की वापसी चाहता था। इसी विवाद के चलते फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं हो सकी, ओसी रद हो गई। वैसे प्राधिकरण के पास 123 फ्लैट मार्गेज है, जिनकी कीमत 400 करोड़ रुपये अधिक है। बकाया को लेकर आकलन गलत किया गया है, जिसे संबंधित अधिकारियों बातचीत की जा रही है। जल्द ही परियोजना का निस्तारण कर दिया जाएगा।

बिल्डर पर प्राधिकरण का 692.48 करोड़ रुपये बकाया

गार्डेनिया एम्स ग्लोरी रेजीडेंट कमेटी सदस्य अनुराग द्विवेदी ने बताया कि परियोजना में 20 टावर है, जिसमें 1586 फ्लैट है, लेकिन एक टावर सील पड़ा है। ओसी मिलने और रद होने की बात बिल्डर ने सोसायटी वासियों से छिपाई। अभी भी बिल्डर मनमानी कर रहा है।

बिल्डर पर प्राधिकरण का 692.48 करोड़ रुपये बकाया है, जिस अमिताभ कांत की रिपोर्ट की सिफारिश को लागू करने के बाद भी बिल्डरों से दो वर्ष कोरोना काल का लाभ देते हुए नोएडा प्राधिकरण कुल बकाया की 25 प्रतिशत 140.53 करोड़ रुपये राशि जमा करने के लिए कहा था, लेकिन आज तक बिल्डर एक रुपया भी प्राधिकरण खाते में जमा नहीं कराया।

जबकि बिल्डर के खिलाफ प्राधिकरण ने भूखंड आवंटन निरस्त करने का सात मई, 27 मई, आठ जुलाई को नोटिस जारी किया। जबकि 28 मई को कुल देयता का बोर्ड भी मुख्य गेट पर लगवा दिया, लेकिन बिल्डर ने तब भी सुध नहीं ली। बिल्डर ने परियोजना में बिना दो तिहाई निवासियों से अनुमति लिए ले आउट प्लान बदवा दिया गया है, जिसमें मार्केट व एक टावर बनाया गया है।

ऐसे में फ्लैट खरीदारों ने बिल्डर से राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है। नोएडा प्राधिकरण अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी ने बताया कि बिल्डर पर लगातार बकाया जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है, उसके कुछ फ्लैट सीज किया गया है। बकाया नहीं जमा करने पर निरस्तीकरण की कार्रवाई होगी।

यह है परियोजना की स्थिति
वर्ग संख्या
कुल एरिया 51700 वर्ग मीटर
कुल बकाया 692.48 करोड़
कुल यूनिट 1586
कंप्लीट यूनिट 1276
ओसी जारी 551 फ्लैट
रजिस्ट्री जीरो फ्लैट
25 प्रतिशत राशि 140.53 करोड़
सुप्रीम कोर्ट में केस फाइल : 15 अप्रैल
  • केस लिस्टेड : 24 अप्रैल
  • नोटिस जारी : 3 मई
  • पहली सुनवाई: 18 नवंबर
Red Max Media
Author: Red Max Media

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