
छत्तीसगढ़ के जिस बस्तर को कभी लाल आतंक के गढ़ के रूप में जाना जाता था, वहां अब माओवादियों का नाम-ओ-निशान मिट चुका है। नक्सलवाद की छाया से धीरे-धीरे मुक्त हो रहा यह क्षेत्र अब विकास और शांति की नई राह पर अग्रसर है।
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले को नक्सल प्रभावित जिलों की लिस्ट से हटा दिया गया है। इसे कभी लाल आतंक के गढ़ के रूप में जाना जाता था लेकिन अब यहां से माओवादियों का नाम-ओ-निशान मिट चुका है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बस्तर जिला को LWE की लिस्ट से हटाकर लेगसी डिस्ट्रिक्ट की लिस्ट में डालने का फैसला लिया है। बस्तर के कलेक्टर हरीश. एस ने इसकी पुष्टि की है।
बस्तर के कलेक्टर एस. हरीश ने केंद्र गृह मंत्रालय के इस फैसले के बारे में कहा कि इसी के साथ LWE के तहत बस्तर को मिलने वाली आर्थिक मदद भी बंद हो गई है। नक्सलवाद प्रभावित जिलों को गृह मंत्रालय LWE (लेफ्ट विंग एक्सट्रमिज्म) की श्रेणी में रखता है। बता दें कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म करने का केंद्र एवं राज्य सरकार का घोषित लक्ष्य है।
बस्तर की नई पहचान
बस्तर संभाग आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जो अपनी सांस्कृतिक विविधता, घने जंगलों, खनिज संपदा और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है। नक्सलवाद की छाया से धीरे-धीरे मुक्त हो रहा यह क्षेत्र अब विकास और शांति की नई राह पर अग्रसर है।
अब नहीं मिलेगा करोड़ों का फंड
वहीं, आपको बता दें कि बस्तर को LWE की श्रेणी में होने की वजह से करोड़ों रुपये का फंड जिले में विकास कार्यों और नक्सल उन्मूलन के लिए मिलता था। मार्च 2025 तक बस्तर जिले को ये राशि जारी की गई थी। अप्रैल 2025 से केंद्र सरकार ने एलडब्ल्यूई फंड पर रोक लगा दी थी. अब बस्तर को LWE श्रेणी से बाहर करने का भी ऐलान कर दिया गया है।
नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में आई गिरावट
गृह मंत्रालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2018 में देशभर में 126 जिले नक्सल प्रभावित थे, जो जुलाई 2021 में घटकर 70 हुए और अप्रैल 2024 तक यह संख्या घटकर मात्र 38 रह गई है। सबसे ज्यादा गंभीर रूप से प्रभावित जिलों की संख्या भी 12 से घटकर अब 6 रह गई है।









One response to “छत्तीसगढ़ का बस्तर नक्सल मुक्त, केंद्र का ऐलान”
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