हिंद महासागर के चप्पे-चप्पे पर भारत की नजर

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भारतीय नौसेना प्रमुख का चीन को सीधा संदेश
भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने चीन को संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर के चप्पे-चप्पे पर भारत की नजर है। उन्होंने साफ किया कि भारतीय नौ सेना को यह भी पता है कि इस क्षेत्र में किन देशों की नौ सेना कहां पर स्थिति है। पहली बार क्वाड देशों के नौसेना प्रमुखों के साथ फिलीपींस के नौसेना प्रमुख ने मंच साझा किया है।
भारतीय नेवी की नजर समूचे हिंद महासागर पर है। वहां दूसरे देशों की नौ सेनाओं की एक-एक गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। भारतीय नौ सेना को यह भी पता है कि इस क्षेत्र में किन देशों की नौ सेना कहां पर स्थिति है, वह क्या कर रही हैं और क्यों कर रही हैं। 

यह बात भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने रायसीना डायलॉग के एक सत्र में कही। इस सत्र की खास बात यह रही कि इसमें क्वाड संगठन के चारों सदस्य देशों के वरिष्ठतम नौ सेना अधिकारियों के साथ फिलीपींस सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रोमियो एस ब्रावनर भी मंच पर उपस्थित थे। इसे क्वाड देशों की तरफ से चीन को दिया गया एक संकेत के तौर पर लिया जा रहा है। 

क्वाड संगठन के सदस्य देश भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान व अमेरिका रायसीना डॉयलाग के मंच से पहले भी हिंद प्रशांत क्षेत्र (खास तौर पर साउथ चाइना सी) में चीन की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों के खिलाफ एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए संकेत देते रहे हैं, लेकिन पहली बार इस क्षेत्र के एक देश के वरिष्ठतम सैन्य अधिकारी के साथ मंच साझा किया गया है। 

ब्रावनर ने की चीन के विस्तारवादी नीति की निंदा
जनरल ब्रावनर ने चीन की विस्तारवादी व आक्रामक सैन्य गतिविधियों की निंदा करने में कोई कोताही नहीं की। उन्होंने विस्तार से बताया कैसे चीन ने वर्ष 1995 में फिलीपींस से 250 किलोमीटर दूर एक द्वीप को मछुआरों के लिए विकसित करने के लिए लिया और वर्ष 2013 में इस पर ना दावा ठोक दिया बल्कि यहां एक हवाई पट्टी, गहरे समुद्र वाला बंदरगाह और सैन्य अड्डा बना चुका है। 

जनरल ब्रावनर ने बताया कि चीन इसके आस-पास के दूसरे द्वीपों पर भी कब्जा कर चुका है। उसका यह व्यवहार गैरकानूनी, विध्वंसक और आक्रामक है। वहां से वह पूरी दुनिया के 50 फीसद कारोबार पर नियंत्रण करने की कोशिश कर सकता है। यह वैश्विक व्यापार के लिए बहुत ही बुरा होने वाला है। 

भारत के साथ फिलीपींस के सैन्य संबंध होंगे मौजूद

जनरल ब्रावनर ने इस सत्र में एक अहम जानकारी भी यह दी कि फिलीपींस चीन के आक्रामक गतिविधियों का सामना करने के लिए अमेरिका, जापान व आस्ट्रेलिया के साथ मिल कर बनाये गये स्कॉवड संगठन में भारत को भी शामिल करना चाहता है। इस सत्र के बाद उन्होंने भारत के साथ फिलीपींस के सैन्य संबंधो को और प्रगाढ़ बनाने व भारत से दूसरे मिसाइल सिस्टम खरीदने की इच्छा भी जताई है। फिलीपींस भारत में निर्मित ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम का पहला खरीददार देश है। जनरल ब्रावनर ने ब्रह्मोस को साउथ चाइना सी में बेहद उपयोगी बताया।

 

महासागर के चप्पे-चप्पे पर है भारत की नजर

इस सत्र में हिंद महासागर में भारत के रणनीतिक हितों से जुड़े एक सवाल के जवाब में भारतीय नौ सेना प्रमुख एडमिरल त्रिपाठी का जबाव

 

“भारत इस क्षेत्र को सुरक्षित बनाने को अपना दायित्व समझता है। हम इस क्षेत्र के छोटे द्वीपों की क्षमता विकसित करने में मदद कर रहे हैं। हमें मालूम है कि इस क्षेत्र में तैनात कुछ देशों के जहाज दोहरी भूमिका निभाते हैं। हम उनकी गहरी निगरानी करते हैं। कई बार हम उन्हें रोकते भी हैं कि वह ऐसा नहीं कर सकते। हम दूसरे साझेदार देशों के साथ मिल कर काम कर रहे हैं। आप आश्वस्त रह सकते हैं कि हिंद महासागर को लेकर आप निश्चिंत रह सकते हैं कि भारतीय नेवी को पता है कि वहां कौन क्या कर रहा है और क्यों कर रहा है।”

यह सीधे तौर पर चीन की नौ सेना की तरफ इशारा है जो हिंद महासागर में लगातार अपनी गतिविधियों को बढ़ाने में जुटा है। यहां बता दें कि बुधवार को भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया व जापान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की भी एक बैठक हुई है। क्वाड के इन सदस्यों के बीच सैन्य अभ्यास के विस्तार को लेकर चर्चा हुई है। अभी ये देश मालाबार नाम से संयुक्त नौ सेना अभ्यास करते हैं।

Red Max Media
Author: Red Max Media

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